किसान आंदोलन पर फोगाट बहनो में छिड़ी जंग ,विनेश ने दी बबिता को बड़ी नसीहत

हरियाणा डेस्क। कृषि कानूनों के विरोध में किसान दिल्ली की सीमाओं को पिछले 20 दिनों से घेरे हुए है, सरकार ने कृषि कानून में संसोधन का प्रस्ताव किसान नेताओ के साथ हुई वार्ता में रखा लेकिन किसान तीनो कानूनों को वापिस करने की बात पर अड़े है। किसान आंदोलन में पक्ष-विपक्ष की आपसी तकरार देखने को मिल रही है जो लाजमी है आखिर विपक्ष का काम है सवाल उठाना विपक्ष तक तो ठीक था लेकिन अब किसान आंदोलन को लेकर फोगाट बहने आमने- सामने है। भाजपा नेत्री एवं अंतरराष्ट्रीय पहलवान बबिता फोगाट (Babita Phogat) व उनकी चचेरी बहन एशियाई खेलो में गोल्ड मैडल जितने वाली अकेली महिला पहलवान विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) के बीच ट्विटर वार शुरू हो गया। एक बहन सरकार के समर्थन में है तो दूसरी बहन किसानो के समर्थन में।

बबिता ने अपने पहले ट्वीट में कहा की ” अब लगता है की किसान आंदोलन को टुकड़े- टुकड़े गैंग ने हाईजैक कर लिया है। सभी किसान भाइयों से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कृपया करके अपने घर वापिस लौट जाएं।माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कभी भी किसान भाइयों का हक नहीं मरने देंगे।कांग्रेसी और वामपंथी लोग किसान का भला कभी नहीं कर सकते |

अपने दूसरे ट्वीट में बबिता ने SYL के मुद्दे पर पंजाब सरकार को घेरा। वही विनेश फोगाट ने बबिता फोगाट
को नसीहत देकर कहा की ” एक खिलाड़ी किसी भी फील्ड में चला जाये आखिर में वो एक खिलाड़ी ही रहता है” राजनीति करना अच्छी बात है, लोगों की भावनाओं को कुछ तुच्छ बातें बोलकर आहत न करें

विनेश फोगाट ने अपने पुरे ट्वीट में कहा की “एक खिलाड़ी हमेशा एक खिलाड़ी ही रहता है चाहे वो किसी भी फ़ील्ड में चला जाए.. मेरा खिलाड़ियों, विशेषकर हरियाणा के खिलाड़ियों से अनुरोध है.. राजनीति करना अच्छी बात है, लेकिन जैसा कि आपने अपने खेल से देश, प्रदेश, समाज और अपने परिवार का नाम हमेशा ऊंचा किया है. उसी मान और सम्मान को बनाए रख़ें राजनीति में भी। उन लोगों की भावनाओं को कुछ तुच्छ बातें बोलकर आहत न करें जो खेलों के मैदान में एक खिलाड़ी को बनाने में हमेशा योगदान देते हैं”.

लोगो की प्रतिक्रिया –

दोनों बहने की ट्विटर पर छिड़ी जंग को देखकर एक ट्वीटर यूजर ने रीट्वीट करके लिखा की ” राजनीति में राजनीतिक बयान देने ही पड़ते हैं। वर्तमान समाज अच्छाई की बात करता है पर जमीनी स्तर पर बोल बच्चन ही ज्यादा वोट-बैंक खड़ा करवाता है। राजनीति में उतरने वाले को आलोचना का आदी हो जाना चाहिए। या राजनीति में उतरना ही नहीं चाहिए। सम्मान आपके नेता बनने के बाद के काम पर मिलेगा उससे पहले चर्चा में बने रहने के लिए बयानबाजी करनी ही पड़ती है। हां बस मर्यादा हमेशा बनाए रखनी चाहिए। इससे सहमत हूं क्योंकि क्षेत्र चाहें जो भी हो मर्यादा गई तो समाज ही दो हिस्सों में बंट जाएगा”

एक अन्य यूजर ने बबिता की बात से सहमत होकर लिखा “जो आंदोलन कर रहे है वह कोई किसान है ही नहीं, इन आंदोलनकारियों का हाल भी शाहीन बाग वालो जैसा ही होगा।
जिन लोगों ने मोदी सरकार को चुना है वे सब देश के साथ है, बाकि सब…… टुकड़े टुकड़े गैंग….।
सही समय पर, सही कदम उठाने में हमारे PM जी को महारत हासिल है। बस थोड़ा इंतज़ार करें।